किसान आंदोलन पर कृषि मंत्री का बयान किसान नेताओं को दिया लास्ट अल्टीमेटम

 किसान और केंद्र सरकार के बीच गतिरोध अभी समाप्त नहीं हुआ है आपको बता दें कि किसान पिछले काफी दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं किसान नेताओं और किसान संगठनों की मांग है कि केंद्र सरकार द्वारा पारित तीनों कृषि बिलों को वापस लिया जाए और एमएसपी  खरीद का कानूनी प्रावधान किया जाए तथा इसे लिखित में वैधानिक मान्यता दी जाए किसानों और केंद्र सरकार के बीच कई स्तर की वार्ताएं है लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है

26 जनवरी को किसान परेड निकाली जाएगी

किसान नेताओं ने 26 जनवरी के दिन किसान ट्रैक्टर रैली निकालने का अल्टीमेटम केंद्र सरकार को दिया है हालांकि किसानों ने यह भी कहा कि यह रैली पूर्णतया हिंसक रहेगी तथा किसान राजपथ और लाल किले का घेराव नहीं करेंगे

11 वे स्तर की वार्ता के बाद किसान नेताओं ने दिया बयान

जब से केंद्र सरकार ने इन तीनों कृषि बिलो को संसद में पास करवाया है तब से पंजाब हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों ने इन कृषि कानूनों का विरोध शुरू कर दिया था किसान पिछले 55 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं अब तक केंद्र सरकार और किसान नेताओं के मध्य 10 स्तर की वार्ता हो चुकी है 11वीं स्तर की वार्ता के बाद जब किसान नेताओं ने मीडिया से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि  किसानों को तीनों कृषि कानूनों की वापसी से कम कुछ भी मंजूर नहीं है हालांकि किसान नेता पहले दिन से कहते आए हैं कि किसान लंबी तैयारियों के साथ दिल्ली की सीमा पर पहुंचे तथा जब तक केंद्र सरकार कानून वापस लेने की घोषणा नहीं करेगी तब तक वह दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहेंगे।

जब मीडिया कर्मियों ने किसान नेताओं से पूछा गया कि क्या वे सरकार से आगे बातचीत करने के लिए तैयार है तो किसान नेताओं ने कहा कि हम सरकार के साथ बातचीत करने के लिए खुले मन से तैयार हैं तथा सरकार जब भी हो ने वार्ता के लिए बुलाएगी तो वे वार्ता करने के लिए जाएंगे

उधर कृषि मंत्री ने बताया किसान नेताओं का बताया अड़ियल

11वीं स्तर की वार्ता के बाद जब के कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर मीडिया से रूबरू हुए तो उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की तरफ से जितना संभावित हो सकता था उतना हमने कर दिया है अब किसान नेताओं को हमारी दिए0 गए प्रस्ताव पर विचार करना है इसी के साथ कृषि मंत्री ने बताया कि कुछ किसान नेता अपने निजी स्वार्थ के कारण किसान और सरकार के मध्य वार्ता को सफल होने देना नहीं चाहते हैं।

आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने किसानों को इन तीनों कृषि कानून बिलों पर डेढ़ साल तक रोक लगाने का आश्वासन दिया है लेकिन किसान नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार इन तीनों कृषि कानून बिलों को वापस नहीं ले लेगी तब तक वह दिल्ली की सड़कों पर बैठे रहेंगे।

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